फुकेत के थलांग लैंड ऑफिस में एक भारतीय खरीदार अपनी विला की रजिस्ट्री कराने पहुंचता है। साथ में बैठा है उसकी थाई कंपनी का थाई शेयरहोल्डर, पासपोर्ट और कंपनी सील लेकर। अफसर सिर्फ कॉर्पोरेट कागज नहीं मांगता, वह शेयरहोल्डर का बैंक स्टेटमेंट, नौकरी का सबूत और यह सवाल भी पूछता है कि खरीद की रकम असल में कहां से आई। दो साल पहले तक यह सवाल असामान्य होता। मई 2026 के मध्य से यह रोज़ की प्रक्रिया बन गई है।
थाईलैंड के डिपार्टमेंट ऑफ लैंड्स ने हर प्रांतीय लैंड ऑफिस को तीन 'most urgent' सर्कुलर भेजे हैं। इनका सीधा मतलब है: अब जमीन रखने वाली हर कानूनी संस्था का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनेगा, महीने में एक बार डेटा मिलान होगा, और हर तिमाही में केंद्रीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। जिस थाई कंपनी में विदेशी शेयरहोल्डर अल्पमत में है, अगर उसमें असली पैसा किसी और ने डाला है और थाई शेयरहोल्डर सिर्फ नाम के लिए है, तो अब वह मामला फ्लैग होकर सालों तक फाइल में दर्ज रहेगा।
नए सर्कुलर असल में क्या बदल रहे हैं?
मई 2026 के मध्य में जारी इन तीन सर्कुलरों ने पहले की बिखरी हुई गाइडलाइनों को एक व्यवस्था में जोड़ दिया है: देशभर की जमीन-मालिक कंपनियों का डेटाबेस, महीने-दर-महीने रिव्यू, और तिमाही रिपोर्टिंग। अगर कोई कंपनी लैंड कोड के सेक्शन 97 और 98 के तहत 'विदेशी न्यायिक व्यक्ति' (foreign juristic person) की परिभाषा में आती है, तो उसकी रिपोर्ट तिमाही चक्र का इंतजार किए बिना तुरंत भेजी जानी होगी।
पहले क्या होता था? लैंड ऑफिस थाई-बहुमत वाली कंपनी देखता, ट्रांसफर रजिस्टर करता और फाइल बंद कर देता। जांच के लिए न डेटाबेस था, न संसाधन। अब हर पुरानी और नई डील एक ही सिस्टम में है। 2019 में जमीन खरीदने वाली कंपनी उसी डेटाबेस में बैठी है जिस में इस हफ्ते का खरीदार दर्ज होगा। शेयरहोल्डर बदलना, फाइलिंग में गड़बड़ी या रजिस्टर्ड पता न मिलना, कोई भी चीज बरसों बाद केस फिर से खोल सकती है।
किन ट्रांजैक्शन पर सबसे ज्यादा जांच होगी?
लैंड कोड का सेक्शन 74 अफसरों को यह कानूनी अधिकार देता है कि वे फंड के स्रोत, आय, पेशा और आर्थिक स्थिति के बारे में सवाल पूछें। यह जांच खासतौर पर दो हालातों में सख्त हो जाती है:
- कैश ट्रांजैक्शन 20 लाख baht (2 million THB) से ऊपर हो, या
- लैंड ऑफिस की आधिकारिक असेस्ड वैल्यू 50 लाख baht (5 million THB) से ज्यादा हो (यह कॉन्ट्रैक्ट प्राइस नहीं, बल्कि ऑफिस का अपना अप्रेज़ल है)।
Bangkok Biznews की रिपोर्ट के अनुसार, यह दोनों सीमाएं खासतौर पर यह पुष्टि करने के लिए हैं कि रकम व्यक्तिगत संपत्ति है, वैवाहिक साझा संपत्ति (joint marital property) नहीं। यानी अगर आप विवाहित हैं और पैसा जॉइंट अकाउंट से आ रहा है, तो अतिरिक्त दस्तावेज तैयार रखना जरूरी है।
किस तरह की कंपनी संरचना अब 'हाई रिस्क' मानी जाएगी?
सबसे लोकप्रिय रहा तरीका, जिसमें थाई नागरिक 51% कैपिटल रखते हैं लेकिन प्रेफरेंस शेयर के जरिए सिर्फ एक वोट डालते हैं जबकि विदेशी शेयरहोल्डर के पास दस वोट होते हैं, अब इंस्पेक्टर की सबसे पहली नजर इसी पर जाती है। सालों तक इसे कानूनी 'वर्कअराउंड' के रूप में बेचा गया, लेकिन नियंत्रण से वंचित थाई बहुमत, नॉमिनी अरेंजमेंट की पाठ्यपुस्तक परिभाषा है।
अगर कोई मामला हाई-रिस्क में आता है तो अफसर शेयरहोल्डर रजिस्टर, डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट में जमा फाइलिंग, फाइनेंशियल रिकॉर्ड मांग सकते हैं, और कंपनी के रजिस्टर्ड पते पर सीधे साइट इंस्पेक्शन भी कर सकते हैं। Mondaq की कानूनी विश्लेषण रिपोर्ट बताती है कि अब प्रांतीय फैक्ट-फाइंडिंग कमेटियों में स्थानीय पुलिस सुपरिंटेंडेंट जैसे विशेष जांचकर्ता भी शामिल किए जा रहे हैं, जिससे शेयरहोल्डिंग, टैक्स और इमिग्रेशन डेटा तक पहुंच पहले से कहीं ज्यादा है।
ध्यान रहे, हाई-रिस्क फ्लैग का मतलब यह नहीं कि रजिस्ट्रेशन रोक दिया जाएगा। यह सिर्फ एक स्क्रीनिंग टूल है, गलती की सजा नहीं। लेकिन इसके बाद जो दस्तावेजी मांग शुरू होती है, वह लंबी और तनावपूर्ण हो सकती है।
क्या 30+30 साल की लीज व्यवस्था अभी भी सुरक्षित है?
छोटा जवाब: नहीं, जितना दावा किया जाता है उतना नहीं। थाईलैंड का सिविल एंड कमर्शियल कोड जमीन पर अधिकतम 30 साल का रजिस्टर्ड लीज ही अनुमति देता है। रिन्यूअल का वादा सिर्फ मौजूदा मालिक की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता है, जमीन के साथ आगे बढ़ने वाला अधिकार नहीं। अगर प्लॉट बिक जाए या कर्ज के चलते जब्त हो जाए, तो दूसरे 30 साल का वादा निभाने वाला कोई बचता ही नहीं। इसे 60 साल की गारंटी समझना एक खतरनाक भ्रम है।
मेरी राय: कब कंपनी स्ट्रक्चर छोड़ देना चाहिए?
अगर बजट 1 करोड़ से 1.5 करोड़ baht (10 to 15 million THB) के बीच है, तो निजी खरीदार के लिए कंपनी स्ट्रक्चर अब आर्थिक रूप से बेमानी हो चुका है। सालाना फाइलिंग, ऑडिट, साइट इंस्पेक्शन का जोखिम, और पांच साल के भीतर मजबूरी में बिक्री का खतरा, ये सब कॉन्डोमिनियम की तुलना में मिलने वाला कीमत का फायदा खत्म कर देते हैं। फॉरेन क्वोटा (किसी प्रोजेक्ट के सेल योग्य क्षेत्र का 49%) में कॉन्डो लेना कहीं बेहतर विकल्प है, टाइटल सीधे विदेशी के नाम पर होता है और यूनिट के लिए पूरा चनोट (chanote) जारी होता है।
लेकिन अगर आप असल में बिजनेस बना रहे हैं, होटल, मैन्युफैक्चरिंग या एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट, और किसी असली थाई पार्टनर के साथ जिसने वाकई पैसा लगाया है और जिसका टर्नओवर फाइलिंग में दिखता है, तो यह सर्कुलर आपको लगभग नहीं छूते। यह स्क्रीनिंग खाली शेल कंपनियों को पकड़ने के लिए है, चलती-फिरती कंपनियों के लिए नहीं।
क्या हर प्रांत में जांच की रफ्तार एक जैसी होगी?
नहीं, और यह ईमानदारी से मान लेना चाहिए। फुकेत, कोह समुई, पटाया और चियांग माई हाई-अटेंशन जोन हैं, जबकि ग्रामीण इसान (Isan) के किसी लैंड ऑफिस में पहली तिमाही में साइट इंस्पेक्शन शुरू होना मुश्किल है। नियम सबके लिए एक जैसे हैं, बस जांच वहां पहुंचने की रफ्तार अलग-अलग है।
एक व्यावहारिक बात: अब साइनिंग और फाइलिंग के लिए सभी पार्टियों की व्यक्तिगत मौजूदगी की मांग बढ़ रही है, क्योंकि अफसर अब पावर ऑफ अटॉर्नी से नहीं, बल्कि सीधे इंसान से सवाल पूछना चाहते हैं।
अगर आपकी प्रॉपर्टी अभी थाई कंपनी के जरिए रखी हुई है, तो तिमाही खत्म होने से पहले तीन चीजें जांच लें: क्या थाई शेयरहोल्डर ने अपने शेयर के लिए वाकई पैसा दिया था, क्या कंपनी का रजिस्टर्ड पता उसकी असल गतिविधि से मेल खाता है, और क्या हर साल की फाइलिंग जमा हुई है। ये तीन चीजें लैंड ऑफिस सबसे पहले चेक करता है, और सवाल उठने से पहले इन्हें ठीक करना कहीं सस्ता है।
स्रोत: Mondaq
